Saturday, November 30, 2024
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Home शिक्षकों और पंचायत सचिवों के लिए सुकून देने वाला फैसला:मध्य प्रदेश के चार लाख 69 हजार कर्मचारियों में जागी पुरानी पेंशन की उम्मीद

शिक्षकों और पंचायत सचिवों के लिए सुकून देने वाला फैसला:मध्य प्रदेश के चार लाख 69 हजार कर्मचारियों में जागी पुरानी पेंशन की उम्मीद

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वर्ष 2005 के बाद नियुक्त केंद्रीय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मध्य प्रदेश के 4 लाख 69 हजार 172 कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन मिलने की उम्मीद बंधी है। इनमें सबसे अधिक 2 लाख 87 हजार अध्यापक हैं, जिनकी नियुक्ति

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ये लाभ उन कर्मचारियों को मिलना है, जिनकी नियुक्ति 2005 के बाद हुई है, पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन नई पेंशन लागू होने से पहले जारी किया गया हो। इसे लेकर राज्यों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर देशभर में माहौल बना हुआ है। राज्यों के हाईकोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट में भी केस चल रहे हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एनपीएस के पक्ष में सरकार की सभी दलीलों और पुरानी पेंशन योजना लागू करने में वित्तीय व्यवस्था के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि जिस आधार पर सरकार ने 1 अप्रैल 2004 से पुरानी पेंशन को रद्द कर एनपीएस लागू किया था, वह गलत था। कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति की तिथि से पुरानी पेंशन का सभी लाभ दिया जाना चाहिए।

पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारी एकजुट

सुप्रीम कोर्ट के इतना कहने के बाद से ही देशभर में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर फिर से स्वर मुखर होने लगे हैं। वहीं कर्मचारी राज्य की सरकारों के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन बहाली को लेकर नेशनल मूवमेंट ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम ने भोपाल में आंदोलन किया था। वहीं लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में भी बड़ा आंदोलन किया गया था।1500 से 3000 रुपए बन रही पेंशनवर्ष 1998 में बड़ी संख्या में शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति हुई थी। सरकार ने वर्ष 2006 में अध्यापक संवर्ग बनाया और शिक्षा कर्मियों को उसमें मर्ज कर दिया। नियमितीकरण की मांग बढ़ी, तो वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उन्हें नए नया संवर्ग (प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षक संवर्ग) बनाकर नियमित कर दिया गया।

इन राज्यों में लागू है पुरानी पेंशन

मध्य प्रदेश में न तो पुरानी पेंशन दी गई है और न ही पदोन्नति दी जा रही है, जबकि विधानसभा चुनाव के पहले राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और झारखंड राज्य अपने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दे चुके हैं। इन राज्यों ने वर्ष 2005 से पहले और बाद का विकल्प भी नहीं रखा है।

राजकुमार पांडेय, सुधीर नायक और शिल्पी शिवान।

राजकुमार पांडेय, सुधीर नायक और शिल्पी शिवान।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, कैशलेस मेडिक्लेम भी दे सरकार

सुप्रीम कोर्ट का आदेश से प्रदेश के 4 लाख 69 हजार 172 कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन मिलने की उम्मीद जागी है। सरकार को चाहिए कि वह पेंशनर्स के लिए कैशलेस मेडिक्लेम का लाभ भी दे ताकि पेंशनर को अपने इलाज के लिए भटकना न पड़े।

-राजकुमार पांडेय, अध्यक्ष, पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन इंदौर

मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन की मांग लंबे समय से

सर्वोच्च न्यायालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय है, जिसमें कहा है कि ऐसे केंद्रीय कर्मचारी जिनका भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2005 से पहले जारी हुआ है, लेकिन नियुक्ति 2005 के बाद हुई। उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए। राज्य सरकार इस निर्णय को मानती है तो मप्र में लाखों कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। मप्र में पुरानी पेंशन की मांग लंबे समय से उठ रही है।

-सुधीर नायक, संरक्षक, नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम मप्र शाखा

इतनी कम राशि में घर खर्च कैसे चलाएं

सरकार क्रमोन्नति, पदोन्नति में तो वर्ष 1998 से सीनियरटी मान रही है, पर पेंशन के मामले में नई नियुक्ति मानकर नई पेंशन योजना का लाभ दे रही है, जिसमें रिटायर होने पर शिक्षक को 1500 से 3000 हजार रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। इतनी कम राशि में कोई घर खर्च नहीं चला सकता है।

-शिल्पी शिवान, अध्यक्ष, आजाद अध्यापक संघ

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